मध्य प्रदेश

Rajasthan में वन विभाग के पास नहीं है बैरक, Salman khan को भी किया था ऑफिस में कैद

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जयपुर: वन विभाग (Rajasthan Forest Department) जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण को लेकर बड़े बड़े दावे करता है, लेकिन वन अपराधों को रोकरने के पुख्ता इंतजाम ही नहीं है. प्रदेशभर में वनों और वन्यजीवों (Wildlife) से जुडे अपराधों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन इनमें पकड़े जाने वाले आरोपियों को रखने के लिए वन विभाग के पास बैरक (Barracks) ही नहीं है. प्रदेशभर के कई वन मंडों के पास बैरक है तो कई वन मंडलों के पास बैरक ही नहीं है. राजधानी जयपुर में भी बैरक के अभाव में आरोपियों (Accused) को पुलिस सुरक्षा में भेजना पड़ता है. वन विभाग के पास बैरक नहीं होने से कई बार आरोपी भाग छूटे हैं. फिर भी वन विभाग कोई इंतजाम नहीं कर रहा है.

बजट (Rajasthan Budget) के अभाव में वन विभाग की अपनी बैरक नहीं बना पा रहा है. विभाग वन अधिनस्थ संघ प्रदेश संयोजक बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ केस तो दर्ज कर लेता है, लेकिन आरोपियों को पुलिस सुरक्षा में भेजना पड़ता है. वन विभाग आरोपी जेल में रखने के लिए पुलिस को लिखित में देना पड़ता है, तब जाकर पुलिस जेल में रखने की अनुमति वन विभाग को देता है. विभाग जब किसी आरोपी को पकड़ते हैं तो उन्हें पेश करने के लिए सबसे बड़ी परेशानी उसे रात के लिए रखने में होती है. यदि वन विभाग जिला में कहीं अपनी बैरक बना ले तो बड़ी आसानी हो जाएगी.

कांकाणी क्षेत्र में हिरण के मामले के समय भी वन विभाग के पास आरोपी सलमान खान (Salman Khan) को रखने के लिए बैरक नहीं थी. 7 दिन तक वन संरक्षक के ऑफिस को ही अस्थाई जेल में तब्दील किया गया. सलमान से वहां ही पूछताछ होती थी. अंदर वन विभाग के रेंजर व गार्ड, बाहर पुलिस बल तैनात रहता था.

वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन सुरक्षा अरिजीत बनर्जी ने बताया कि आए दिन वनखंडों में मोर, हिरण, पाटागोह, शियार, सेही समेत कई वन्यजीवों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ऐसे में आरोपियों को पकड़ने के बाद वन अधिकारियों को पूछताछ के दौरान कार्यालय में बिठाए रखना पड़ता है और रात के समय पुलिस की मदत लेनी पड़ती है. ऐसे में बैरक जरूरी है. ऐसे में कई वन मंडलों में बैरक बनी हुई है, जिसका कोई उपयोग ही नहीं हो पा रहा है. ऐसे में अधिकतर वनरेंज क्षेत्र में दो या तीन थाने आ जाते हैं.

वन विभाग के द्वारा पकडे जाने वाले आरोपियों को थाने में ही भेज दिया जाता है. इस लिए विभाग बैरक बनाने में भी रूची नहीं दिखा रहा है. विभाग के सामने सबसे बडी समस्या बजट की आती है और जो बिल्डिंग बनी हुई है वह भी बहुत पुरानी है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है कि यदि आप किसी आरोपी को कस्टडी में रखते है तो उसके लिए विभाग को सीसीटीवी कैमरे बैरक के अंदर और बाहर लगाना होगा, जिसके लिए बडा खर्चा करना पडेगा. ऐसे में विभाग आरोपियों को नजदीकि थाने में ही भेज दिया जाता है. वन अधिकारियों के अनुसार रणथम्भौर, सरिस्का, मुकुंदरा में बैरक हैं. जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बांसवाड़ा सहित अन्य स्थानों पर बैरक नहीं हैं. ऐसी कोई दिक्कत नहीं है, आरोपियों को पुलिस थानों में रखा जाता है. वहां कोई दिक्कत नहीं आती है.

वन विभाग जैसे ही किसी मुजरिम को लकड़ी चोरी या अन्य मामलों को लेकर पकड़ते हैं तो फिर उसके बाद यदि अगले दिन कोर्ट में पेश करना पड़ जाए तो फिर रात में आरोपी को अपनी कस्टडी में नहीं रख सकते क्योंकि आरोपी कहीं सुसाइड न कर ले. इसके बाद पुलिस हिरासत में आरोपी को भेज दिया जाता है. डेढ—दो साल पहले पूछताछ के दौरान नाहरगढ़ रेंज की चौकी से तस्करी का आरोपी व्यापारी रात को भाग गया था. उसे वापस पकडऩे में विभाग को खासा पसीना बहाना पड़ा. गत वर्ष कोलायत क्षेत्र में गिरफ्तार एक शिकारी वन विभाग की हिरासत से भाग गया था. आधी रात को वह लघुशंका के बहाने उठा और कर्मचारी पर हमला कर चम्पत हो गया.

अब जरूरत है तो वन विभाग के करीब 400 वन रेंज क्षेत्र में बैरक बनाने की आवश्यकता है. वन्यजीवों की सुरक्षा और वन तस्करी को ध्यान में रखकर सुरक्षा की दृष्टि से बैरक बनाने की आवश्यकता है.

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