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Nepal में राजशाही लागू करने की उठी मांग, PM ओली से नाराज हैं लोग

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काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की चीन परस्त नीतियों से जनता इतनी आजिज आ गई है कि फिर से राजशाही व्यवस्था लागू करने की मांग कर रही है. नेपाल के लोग राजशाही में सीमित अधिकारों में जीने को तैयार हैं, लेकिन वह ओली को अब देश का नेतृत्व करते नहीं देखना चाहते. सोमवार को भी राजशाही समर्थकों ने रैली निकालकर ओली सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया. 

पार्टी में घमासान
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (K. P. Sharma Oli) चीन (China) की तरफ झुकाव रखते हैं. नेपाल की नीतियों में चीनी प्रभाव साफ तौर पर नजर आया है. चीन ने नेपाल (Nepal) के कुछ हिस्सों पर भी कब्ज़ा कर रखा है, लेकिन सरकार खामोश है. ओली की इसी खामोशी को लेकर अब उनकी पार्टी के साथ-साथ देशभर में सवाल उठ रहे हैं. सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी भी दो भागों में विभाजित हो चुकी है. एक गुट का नेतृत्व प्रधानमंत्री ओली कर रहे हैं, जबकि दूसरे गुट का पुष्प कमल दहल प्रचंड (Pushpa Kamal Dahal).  

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PM ओली का चीन प्रेम और पार्टी में बढ़ती कलह का खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ रहा है. कोरोना वायरस ने नेपाल की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है. ऐसे में लोगों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है. इसके अलावा, सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें भी मजबूत होती जा रही हैं. यही कारण है कि देश में राजशाही के समर्थन में आवाज उठने लगी है. राजशाही समर्थकों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में रैलियां आयोजित करने के बाद सोमवार को काठमांडू में विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने संघीय व्यवस्था को खत्म करने और देश बचाने के लिए राजशाही व्यवस्था लागू करने के मांग की. 

तीन प्रमुख एजेंडे हैं
राष्ट्रीय शक्ति नेपाल (RSN) ने मौजूदा संविधान को फाड़ने की धमकी देते हुए कहा कि देश में शांतिपूर्ण तरीके से ‘हिंदू किंगडम’ बहाल किया जाना चाहिए. RSN के अध्यक्ष केशर बहादुर बिस्टा ने राजशाही का समर्थन करते हुए कहा, ‘हमारे तीन प्रमुख एजेंडे हैं- संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना, नेपाल को एक हिंदू राष्ट्र के रूप में बहाल करना और संघवाद को खत्म करना, क्योंकि यह लोगों को विभाजित करता है और राष्ट्र को खतरे में डालता है’. उन्होंने आगे कहा कि आम जनता का बचना मुश्किल हो गया है, देश संकट में है, लेकिन, हमारे नेता देश को लूट रहे हैं.

2008 में खत्म हुई थी राजशाही
 

नेपाल में 28 मई 2008 को राजशाही पूर्ण रूप से खत्म हो गई थी. 2017 में हुए चुनाव में तत्कालीन सीपीएन-यूएमएल और सीपीएन (माओवादी दलों) के कम्युनिस्ट गठबंधन को जनादेश मिला. हालांकि, बाद में इन सभी दलों ने मिलकर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी बनाई, जो वर्तमान में देश पर शासन कर रही है. मौजूदा प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली फरवरी 2018 में दूसरी बार नेपाल की सत्ता में लौटे थे. शुरुआत में तो सबकुछ ठीक चला, लेकिन ‘चीन प्रेम’ के चलते जल्द ही वह दूसरों के निशाने पर आ गए.

 



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