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Love Jihad पर चिदंबरम ने शुरू किया नया विवाद, कही ये बड़ी बात

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नई दिल्ली: कांग्रेस के दिग्गज नेता पी.चिदंबरम (P.Chidambaram) ने लव जेहाद (Love Jihad) पर नया विवाद शुरू करते हुए इसे ‘बहुसंख्यकों के एजेंडे’ (Agenda of Majority) का हिस्सा बताया है. उन्होंने कहा कि लव जेहाद एक छलावा है. यह कोर्ट में नहीं टिक पाएगा क्योंकि कानून में विभिन्न धर्मों के बीच विवाह को अनुमति दी गई है.

‘अंतर-विवाह के खिलाफ कानून लाना असंवैधानिक होगा’
देश के पूर्व गृह मंत्री रहे पी. चिदंबरम (P.Chidambaram) ने कहा कि अंतर-विवाह के खिलाफ कानून लाना पूरी तरह असंवैधानिक होगा. लव जेहाद पर कानून लाना एक छलावा से ज्यादा कुछ नहीं है. यह देश में ‘बहुसंख्यकों के एजेंडे’ (Agenda of Majority) को लागू करने की कोशिश है. भारतीय कानून के तहत विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच विवाह की अनुमति दी गई है. यहां तक कि तमाम सरकारें भी इसे प्रोत्साहित करती हैं. 

ये भी पढ़ें- कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम बोले- फिर बहाल हो अनुच्छेद 370, बीजेपी ने दिया करारा जवाब

बीजेपी शासित सरकारें ला रही हैं ‘लव जेहाद’ (Love Jihad) पर कानून 
बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पहचान छुपाकर शादी करने वालों के खिलाफ अध्यादेश लागू करने जा रही है. वहीं बीजेपी शासित हरियाणा और मध्य प्रदेश ने भी अपने यहां ऐसा ही कानून लाने की घोषणा की है. बीजेपी (BJP) शासित सरकारों का कहना है कि वे ऐसा कानून कथित `लव जेहाद`  (Love Jihad)  के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते ला रही हैं. ऐसे मामलों में मुस्लिम पुरुषों ने अपनी धार्मिक पहचान को छुपाकर हिंदू लड़कियों को फंसाकर अपना शिकार बनाया. 

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RSS प्रमुख के दौरे के बाद तेज हुई हलचल
सूत्रों के अनुसार RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इस सप्ताह अपनी दो दिवसीय लखनऊ यात्रा के दौरान धर्म परिवर्तन का मुद्दा भी उठाया था. जिसके बाद से देश भर में बीजेपी (BJP) शासित सभी राज्यों में इस पर कानून बनाने को लेकर तैयारी तेज हो गई है. वहीं कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को लोगों को मुख्य विषयों से ध्यान भटकाने की चाल बता रहे हैं. 

देश के 8 राज्यों में लागू है धर्मांतरण विरोधी कानून
जानकारी के मुताबिक 1967 में ओडिशा इस कानून को लागू करने वाला पहला राज्य था. इसके बाद 1968 में मध्य प्रदेश में यह कानून लागू हुआ था. फिलहाल देश के 8 राज्यों अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं. लेकिन इन कानूनों में इतनी खामियां हैं कि सरकारें धर्मांतरण में लगे लोगों पर आज तक सख्ती से अंकुश नहीं लगा पाई हैं.  



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