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DNA ANALYSIS: Farmers Protest में ‘पर्यटन’ करने वालों का सच भी जान लीजिए…

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नई दिल्ली: अब हम आपको किसान आंदोलन की कुछ कहानियां दिखाना चाहते हैं. ये कहानियां उन लोगों की हैं, जो सुविधा और छुट्टी के हिसाब से किसानों के बीच पहुंचते हैं. किसानों के साथ सेल्फी लेते हैं और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, जिससे ये लगे कि वो किसानों के सच्चे हमदर्द हैं. ये फुर्सत वाले क्रांतिकारी हैं. किसानों के समाधान से कोई लेना देना नहीं है. ये तो आंदोलन का इस्तेमाल सुर्खियां बटोरने के लिए करते हैं. 

भोले-भाले किसानों के आंदोलन (Farmers Protest) में सेल्फ़ी वाली क्रांति की कई तस्वीरें दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर (Ghazipur Border) से सामने आई हैं. जहां कुछ नौजवान साइकिल पर स्टंट करते हुए दिखे. इन लोगों ने बताया कि वो किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए वहां पहुंचे हैं. लेकिन ये लोग इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए कि आख़िर किसान किन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं.

गाजीपुर बॉर्डर से वीकेंड क्रांति की तस्वीरें
गाजीपुर बॉर्डर से वीकेंड क्रांति की कुछ और तस्वीरें सामने आईं. जहां किसान 12 दिनों से धरने पर बैठे हैं. लेकिन एक और चीज़ है, जिसने लोगों का ध्यान गाजीपुर बॉर्डर की तरफ़ खींचा है. ये एक ट्रैक्टर ट्रॉली, जो उत्तराखंड से आई है. इस ट्रैक्टर ट्रॉली में AC लगा है. इसे चलाने के लिए बाहर सोलर पैनल लगाए गए है, ट्रॉली के अंदर इंतजाम किसी घर जैसे ही हैं. गद्दे लगे हैं. मोबाइल फ़ोन की बैटरी चार्ज करने की व्यवस्था की गई है. इस ट्रॉली को प्रदर्शन में लाने वाले लोगों का कहना है कि इसे उन्होंने किसानों की मदद के लिए तैयार किया है.

पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब ज़िले में भी कल एक शादी के दौरान किसानों के समर्थन में नारेबाज़ी हुई. बारातियों ने नाच गा कर किसानों को अपना समर्थन जाहिर किया. उन्होंने झंडे उठा कर नारेबाज़ी भी की. लेकिन एक भी व्यक्ति ये ठीक ढंग से नहीं बता पाया कि वो किन मांगों के लिए किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं.

टिकरी बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन की वजह से रेहड़ी पटरी पर दुकान लगाने वालों का काम चला पड़ा है. बाज़ारों में भीड़ लगी हुई है. किसान नए कपड़े खरीद रहे हैं. ऐसे में दुकानदार चाहते हैं कि ये प्रदर्शन आगे भी इसी तरह चलता रहे ताकि उनकी कमाई पर कोई असर न पड़े.

कुछ तस्वीरें करनाल से भी आई हैं. 3 दिसम्बर को पेशे से सिविल इंजीनियर सुमित ने तय किया कि वो किसानों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए घोड़ी की जगह ट्रैक्टर से अपनी शादी में जाएगा. ऐसा करके उसने लोगों का ध्यान भी खींचा. शादी में किसानों का मुद्दा भी छाया रहा. लेकिन जब दूल्हे से ये पूछा गया कि वो किसानों की किन मांगों का समर्थन कर रहा है, तो वो कोई सही जवाब नहीं दे पाया.

किसान आंदोलन को देखने के लिए भी दिल्ली के सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर लोग पहुंच रहे हैं. ये लोग किसानों के साथ सेल्फ़ी लेना चाहते हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर डालना चाहते हैं. यानी ऐसे लोगों के लिए आंदोलन एक मौका है खुद को सुर्खियों में लाने का. ऐसे लोगों से किसानों को सावधान रहना चाहिए.

8 राज्यों की सरकारों का समर्थन
आज देश की 20 राजनीतिक पार्टियां मिलकर आपका जीवन अस्त-व्यस्त कर रही हैं. बंद को 8 राज्यों की सरकारों का समर्थन मिल गया है. हालांकि व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने कहा है कि दिल्ली और देश भर में बाज़ार खुले रहेंगे और ट्रांसपोर्ट बंद में शामिल नहीं होगा. भारत बंद का समर्थन करने वाले नेताओं का दावा है कि सुबह 11 बजे से तीन बजे तक चक्का जाम किया जाएगा और  दिल्ली में दूध, फल और सब्जी जैसे जरूरी सामान भी नहीं पहुंचेंगे. वर्ष 2020 में ज्यादातर समय भारत में, लॉकडाउन (Lockdown) यानी बंद ही रहा है. इसके बाद भी विपक्ष पार्टियों ने बंद का समर्थन किया है.

– कांग्रेस ने भारत बंद का समर्थन किया है, इसलिए जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार या कांग्रेस के समर्थन से चलने वाली सरकार है वहां इसका प्रभाव ज्यादा दिखाई दे सकता है. यानी महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड में बंद का ज्यादा असर हो सकता है.

– आम आदमी पार्टी भी भारत बंद का समर्थन कर रही है. यानी आज दिल्ली वालों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं.

– दिल्ली में ऑटो रिक्शा की एक बड़ी यूनियन भारत बंद में शामिल नहीं है. हालांकि कुछ Auto Rickshaw Unions और टैक्सी यूनियन्स इस भारत बंद का समर्थन कर रही हैं. इसमें Mobile Apps Based Taxi Services भी शामिल हैं. यानी अगर आप दिल्ली या आस-पास के इलाकों में रहते हैं और आप Mobile Apps Based Taxi Services लेते हैं तो कल आपको कहीं आने-जाने में परेशानी हो सकती है.

– लोगों पर भारत बंद का असर न हो इसके लिए दिल्ली पुलिस ने भी तैयारियां की हैं. कोई भी व्यक्ति अगर जबरदस्ती बंद कराने या हिंसा फैलाने की कोशिश करेगा तो उसपर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

– समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी भारत बंद के पक्ष में हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश में इसका असर हो सकता है.

– राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी पार्टियां भी भारत बंद के साथ हैं, इसलिए बिहार में भी कल आम लोगों को दिक्कत हो सकती है.

– भारत बंद को TRS यानी तेलंगाना राष्ट्रीय समिति का भी समर्थन है यानी तेलंगाना की सरकार भी इसमें शामिल है. इसलिए यहां भी बंद का असर दिखाई दे सकता है. हालांकि तेलंगाना में इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी.

– तमिलनाडु में विपक्षी पार्टियां बंद के पक्ष में हैं, इसलिए वहां पर भी इसका असर हो सकता है.

देश में किसानों की संख्या लगभग 15 करोड़ है, लेकिन इनके नाम पर राजनीति करने वाले नेता कल बंद करके देश के 135 करोड़ लोगों को बंधक बनाने की कोशिश करेंगे.

– एक दिन के भारत बंद से लगभग 32 हज़ार करोड़ रुपए का नुकसान होता है. हालांकि ये सिर्फ एक अनुमान है और असली आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हो सकते हैं.

– आप ये मत समझिए कि आपके ऊपर बंद का कोई असर नहीं होगा. क्योंकि देश के 32 हज़ार करोड़ रुपए के नुकसान में आपका नुकसान भी शामिल है.

– भारत में लगभग 20 करोड़ परिवार हैं और अगर हम 32 हज़ार करोड़ रुपए को इन 20 करोड़ परिवारों में बांटें तो हर एक परिवार को औसतन 1600 रुपए का नुकसान होगा और 1600 रुपए कमाने में भारत के किसानों को लगभग 8 दिन लग जाते हैं.

विरोध के लिए पुराने अंग्रेजों के समय वाले तरीके क्यों अपनाए जा रहे?
हालांकि यहां सवाल ये भी है कि 21वीं सदी में विरोध के लिए पुराने अंग्रेजों के समय वाले तरीके क्यों अपनाए जा रहे हैं? इस समय देश में शारीरिक नहीं बौद्धिक प्रदर्शनों की जरूरत है. चिट्ठी और टेलीग्राम के युग से हम लोग WhatsApp और Telegram जैसे Mobile Apps तक आ चुके हैं. आज के इस Digital युग में सोशल मीडिया की मदद से आंदोलन के लिए समर्थन जुटाया जा रहा है. लेकिन राजनीतिक पार्टियों के प्रदर्शन का तरीका अब भी पुराना ही है. राजनीतिक पार्टियां चाहें तो किसी समस्या का हल बताकर और विकल्प लाकर भी विरोध कर सकती हैं. हालांकि देश में विरोध के इस सकारात्मक तरीके का इस्तेमाल नहीं किया जाता है.

भारत बंद और प्रदर्शनों की शुरुआत
भारत बंद (Bharat Bandh) और प्रदर्शनों की शुरुआत स्वतंत्रता आंदोलन से हुई थी. महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन किया था और भारत बंद को एक राजनैतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया था. हालांकि तब हमारा देश गुलाम था, तब अंग्रेज़ों का विरोध करने के लिए भारत बंद का आह्वान किया जाता था. लेकिन अब अंग्रेज जा चुके हैं, और गांधी जी ने वर्षों पहले जो आंदोलन किया था वो आज के डिजिटल युग के मुताबिक सही नहीं हैं. अगर आज महात्मा गांधी होते तो शायद वो भी लोगों को भारत बंद करने से रोक देते.

डिजिटल युग में भारत बंद कराना लगभग असंभव
वैसे भी आज के डिजिटल युग में भारत बंद कराना लगभग असंभव है क्योंकि, अगर बाजार बंद भी हो जाएं, तब भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शॉपिंग चलती रहती है. ऑफिस बंद होते हैं तो Work From Home चलता रहता है. संभव है कि कल कुछ सड़कों और बाज़ारों को बंद करा दिया जाएगा. लेकिन हमारे देश में खाना ऑर्डर करना, बैंक के काम, बस, ट्रेन, प्लेन और कार बुक करना, ये सब काम बंद के बावजूद किए जा सकते हैं. तो फिर भारत बंद कैसे हो सकता है.



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