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DNA ANALYSIS: चीनी का ‘Honey Trap’, आपका शहद कितना शुद्ध है? जानें सच्चाई

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नई दिल्ली: आज हम बात करेंगे आपके स्वास्थ्य का ख्याल रखने वाले शहद की. वैसे किसानों और शहद के बीच भी एक रिश्ता है और वो रिश्ता बनाती हैं मधुमक्खियां. मधुमक्खी पालन जितना ज्यादा होगा, किसानों की फसल का उत्पादन उतना ही अच्छा हो सकता है. मधुमक्खियां पैदावार बढ़ाने की अहम कड़ी होती हैं. क्योंकि, मधुमक्खियां पॉलिनेशन का काम करती हैं. वो फसलों के पराग के कणों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम करती हैं.

शहद इतना महत्वपूर्ण है इसलिए शहद में मिलावट पर आई ताज़ा रिपोर्ट ने देश के लोगों को हैरान कर दिया है. भारत के एक NGO, Centre for Science and Environment यानी CSE द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट से शहद में मिलावट पर 4 बड़ी बातें सामने आईं हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक,

-बाज़ार में मिलने वाला 80 प्रतिशत शहद मिलावटी है.

-भारत के कई बड़े ब्रांड्स के शहद में चीनी की मिलावट पाई गई है.

-भारत की Labs इस मिलावट का पता नहीं लगा पाईं.

-Germany की एक लैब में NMR टेस्ट से भारतीय शहद में मिलावट पकड़ी गई.

-Food Safety and Standards Authority यानी FSSAI के मुताबिक किसी भी शहद को शुद्ध होने के लिए उसे कम से कम 50 Tests पर खरा उतरना होता है. हालांकि इसके बाद भी बाजार में मिलने वाला ज्यादातर शहद शुद्ध नहीं है.

मिलावट की पहचान
शहद में मिलावट के मुद्दे पर FSSAI का कहना है कि शहद में किसी भी मिलावट की पहचान करने में उनकी टेस्टिंग तकनीक सक्षम है. वहीं NMR यानी Nuclear Magnetic Resonance (न्यूक्लियर मैगनेटिक रेज़ोनेंस) टेस्ट की कीमत बहुत ही ज्यादा है, जिसका असर शहद की कीमतों पर भी पड़ सकता है. हालांकि FSSAI ने कहा है कि CSE से उनके जांच किए गए सैंपल्स मंगा लिए गए हैं. इन सैंपल्स की दोबारा जांच करके आगे फैसला किया जाएगा.

इस समय दुनिया के लगभग 780 करोड़ लोग Corona से बचने के लिए अपनी Immunity यानी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. आप भी जरूर अपनी Immunity बढ़ाने के लिए कई प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे होंगे और इनमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला प्रोडक्ट है शहद. लोग सुबह उठते ही गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीते हैं. वो मानते हैं कि ऐसा करने से उनकी Immunity बढ़ेगी और वजन घटेगा.

इससे वो फिट रहेंगे और कोरोना वायरस के संक्रमण से भी बचेंगे. Covid Infection से बचने के लिए और कोरोना संक्रमण से ठीक होने के लिए आजकल काढ़ा भी खूब पिया जा रहा है, इसमें भी शहद का इस्तेमाल होता है. लेकिन मिलावटी शहद का इस्तेमाल आपको कोरोना संक्रमण से बचाने के बदले और बीमार बना सकता है. आप जान कर हैरान होंगे कि दुनिया में सबसे ज्यादा मिलावट शहद में ही होती है.

आम आदमी के साथ सबसे बड़ा घोटाला
संभव है कि आपके डॉक्टर ने भी आपको शहद का इस्तेमाल करने की सलाह दी होगी. हालांकि आपके पास मौजूद शहद के शुद्ध होने की संभावना बहुत कम है और इससे आपका वजन कम होने के बदले और बढ़ सकता है. ये आम आदमी के साथ सबसे बड़ा घोटाला है. इसलिए आज से ऐसी कंपनियों और व्यापारियों को हम ‘मधु माफिया’ का नाम दे रहे हैं.

शहद में मिलावट पर इस रिपोर्ट के बाद भारत में शहद बेचने वाली कंपनियों ने सफाई दी है.

– इन्होंने कहा है कि उनका शहद सौ प्रतिशत शुद्ध और स्वदेशी है.
– भारतीय कंपनियां चीन से शहद या Sugar Syrup नहीं खरीदती हैं और ये शहद भारतीय मधुमक्खी-पालकों से लिया जाता है.
– इसे भारतीय शहद उद्योग और निर्माताओं को बदनाम करने की साज़िश बताया गया है ताकि Processed Honey को बढ़ावा दिया जा सके.
– ऐसा करके German Technology और मशीनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिनकी कीमत करोड़ों रुपए है.

कीमत क्वालिटी के हिसाब से तय होती है
शहद में मिलावट के पीछे साधारण सा गणित है. आप ये गणित समझ जाएंगे तो मिलावट की वजह भी साफ हो जाएगी. शहद कारोबारी मधुमक्खी पालकों से शुद्ध शहद 100 रुपए प्रति किलो से लेकर 1000 रुपए प्रति किलो तक खरीद सकते हैं. ये कीमत क्वालिटी के हिसाब से तय होती है, जबकि Sugar Syrup केवल 40 रुपए किलो में मिल जाता है. अब आप सोचिए, रिटेल मार्केट में आपको शहद 200 से 400 रुपए किलो की औसत कीमत पर मिल जाता है. शहद की प्रोसेसिंग, पैकिंग और ट्रांसपोर्टेशन यानी सारी लागत लगाने के बाद भी आपको वो शहद 200 रुपए किलो मिल रहा है जिसकी Raw material की कीमत ही 100 रुपए से शुरू होती है.  

भारत में मिलावटी शहद बेचने वालों को चीन से मदद मिलती है. यानी आपके शहद में चीनी की घुसपैठ भी है और चीन की घुसपैठ भी.

 गारंटी के साथ Sugar Syrup बेचा जाता है
चीन की Websites पर गारंटी के साथ ऐसा Sugar Syrup बेचा जाता है, जो Test Proof होता है. यानी शहद में इस Sugar Syrup की मिलावट को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन भी होता है. इस समय भी चीन की कई कंपनियां ऐसा Test Proof, Sugar Syrup बेच रही हैं. शहद में मिलावट करने वाले मधु माफिया अक्सर इसे पकड़ने की कोशिश करने वालों से दो कदम आगे रहते हैं. भारत सरकार को भी इसकी जानकारी है, और वो जब भी कोई नई Guidelines लाती है तो ‘मधु माफिया’ इससे बचने के लिए कोई नया Sugar Syrup ले आते हैं.

– दिलचस्प बात ये है कि चीन दुनिया में सबसे ज्यादा शहद का निर्यात करता है, हालांकि इसके मिलावटी होने की संभावना बहुत ज्यादा है.

– वर्ष 2006 तक शहद में मिलावट इतने बड़े पैमाने पर नहीं हो रही थी. इसके बाद चीन से Sugar Syrup का आयात होने लगा और फिर शहद में मिलावट शुरू हो गई.

– 2 वर्ष पहले तक भारत में 11 हज़ार मीट्रिक टन Sugar Syrup आयात होता था और इसका 70 प्रतिशत चीन से आयात किया जाता था.

– माना जाता है कि इसमें से ज्यादातर Sugar Syrup का इस्तेमाल शहद में मिलावट के लिए किया गया.

– हालांकि अब कुछ भारतीय कारोबारियों ने चीन की कंपनियों से ये तकनीक खरीदकर देश में ही Sugar Syrup बनाना शुरू कर दिया है. यानी अब शहद में मिलावट करना और आसान हो गया है.

अगर कभी छापेमारी में शहद बनानेवाली कंपनियों के पास ऐसा Sugar Syrup मिलता है तो वो दावा करती हैं कि इसका इस्तेमाल टॉफी बनाने के लिए किया जाता है. यानी बचाव के लिए इन कंपनियों के पास सभी उपाय होते हैं.

शुद्धता को एक मौलिक अधिकार का दर्जा
विडंबना ये है कि जिस शुद्धता को एक मौलिक अधिकार का दर्जा मिलना चाहिए था वो शुद्धता भारत में एक Luxury बनकर रह गई है और जो लोग इस Luxury की कीमत नहीं चुका सकते, वो मिलावटी भोजन करने को मजबूर हैं ।

कानून के मुताबिक अगर मिलावटी सामान की वजह से किसी की मौत हो जाती है तो आरोपी को उम्र कैद की सज़ा हो सकती है और उस पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी हो सकता है. लेकिन अगर मिलावटी सामान से किसी को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचता है तो आरोपी को सिर्फ 6 महीने की सज़ा होती है. गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचने की स्थिति में 6 साल की सज़ा के साथ साथ 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. यानी मिलावट को रोकने के लिए कानून तो मौजूद हैं. लेकिन इसका असर मिलावट-खोरों पर नहीं हो रहा है.

शहद के स्रोत की जानकारी
हालांकि मिलावट रोकने के लिए कुछ और कदम भी उठाए जा सकते हैं. FSSAI चाहे तो शहद का Nuclear Magnetic Resonance यानी NMR टेस्ट जरूरी कर सकती है.  इस समय शहद का एक्सपोर्ट करने के लिए ये टेस्ट करना जरूरी है और शहद बेचने वाली कंपनियों के लिए शहद के स्रोत की जानकारी देना भी अनिवार्य किया जाना चाहिए.

ये वर्ष कोरोना वायरस संक्रमण का वर्ष है. जिससे बचने के लिए हर कोई अपनी immunity बेहतर करना चाहता है. लोगों की इस सोच ने Immunity को सबसे बड़े बाज़ार में बदल दिया है. इसलिए देश में हज़ारों करोड़ रुपए के शहद का बिजनेस होता है. शहद की ज्यादा मांग ने ज्यादा मिलावट को भी बल दिया है.

शहद में मिलावट की समस्या को समझाने के लिए हमने एक Ground Report तैयार की है. जिसके बाद आप ये समझ जाएंगे कि शहद में मिलावट कैसे की जा रही है.

शुद्ध शहद क्या होता है?
क्या आपके शहद में चीनी है? सेंटर फ़ॉर साइंस की इस रिपोर्ट के आने के बाद हमने इस बात की पड़ताल शुरू की. लेकिन शहद में चीनी या किसी भी मिलावट की जरूरत होती ही क्यों है? सबसे जरूरी था ये समझना कि शुद्ध शहद क्या होता है.

शुद्ध शहद में किसी भी तरह की मिलावट की जरूरत नहीं होती. लेकिन शुद्द शहद की कीमत 500 से 1000 रुपए प्रति किलो या इससे ज्यादा भी हो सकती है. शहद को सस्ता करने के लिए उसकी मात्रा बढ़ानी ज़रुरी है और ये काम मिलावट करके ही किया जा सकता है. इसीलिए शहद में चीनी, गुड़, चावल का सिरप, मक्के का सिरप या पूरी तरह केमिकल्स से बना सिरप मिलाकर भी इसे बेचा जा सकता है. इस आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि आप जो शहद बाजार से खरीदकर लाए हैं. उसमें शहद की मात्रा केवल 10 फीसदी ही हो, बाकी सब मिलावटी हो. शुद्ध शहद अपने आप में किसी दवा से कम नहीं है. लोग शहद का प्रयोग वज़न घटाने, इम्युनिटी बढ़ाने, डायबिटीज़ जैसी कई बीमारियों से बचने के लिए करते हैं. लेकिन अगर शहद में चीनी मिला दी जाए तो जिन बीमारियों से बचने के लिए आप शहद खा रहे हैं, वही शहद आपको बीमार कर सकता है.

शहद को सबसे सुरक्षित मीठा माना जाता है. दुनिया में फूलों की जितनी किस्में होती हैं उतनी ही किस्म के शहद बनाए जा सकते हैं. आपको शायद जानकर हैरानी हो कि अजवायन, जामुन, लीची से लेकर यूकेलिप्टस और नीम के फूल से भी शहद बनता है. लेकिन अगर आप ये सोच रहे हैं कि आपके घर में जो शहद है उसकी शुद्दता की पहचान आप कैसे कर सकते हैं तो हम आपको बता दें कि ये काम बहुत आसान नहीं है. भारत में शहद बेचने के लिए उसे 50 तरह के टेस्ट पास करने पड़ते हैं उसके बाद भी बाज़ार में 80 प्रतिशत मिलावटी शहद ही बिक रहा है। फिर भी कुछ तरीके हैं जिससे आप शहद की क्वालिटी कुछ हद तक चेक कर सकते हैं

और हां, अगर आपको लगता है कि शहद अगर जम जाता है तो वो नकली ही होगा. ऐसा नहीं है. शहद किस किस्म के पौधे से बना है. किस तापमान पर स्टोर किया गया है. उसकी पैकिंग और प्रोसेसिंग कैसी है. इस आधार पर शहद का गाढ़ा या हल्का होना निर्भर करता है.

शुद्ध शहद स्वादिष्ट होने के साथ साथ पौष्टिक भी होता है. सर्दियों से इसका इस्तेमाल दवा के रूप में किया जाता है. आयुर्वेद में शहद को अमृत के समान माना गया है. हालांकि मुनाफा कमाने के लिए कई कंपनियां इस अमृत में मिलावट कर रही हैं. इस मिलावट को समझने के लिए हम आपके साथ National Bee Board से मिले कुछ आंकड़े शेयर करना चाहते हैं.

– पिछले एक वर्ष में देश में 11 करोड़ 50 लाख किलोग्राम शहद का उत्पादन हुआ.
– लगभग 6 करोड़ 25 लाख किलोग्राम शहद का निर्यात किया गया.

और हमें चौंकाने वाली जानकारी ये मिली कि देश में हर वर्ष करीब 3 करोड़ किलोग्राम मिलावटी शहद का इस्तेमाल किया जाता है. संभव है कि आपने भी ये मिलावटी शहद खरीदा गया होगा और सौ प्रतिशत शुद्ध मानकर उसका सेवन भी किया होगा.

विडंबना ये है कि जिस शुद्धता को एक मौलिक अधिकार का दर्जा मिलना चाहिए था वो शुद्धता भारत में एक Luxury बनकर रह गई है और जो लोग इस Luxury की कीमत नहीं चुका सकते. वो मिलावटी भोजन करने को मजबूर हैं.

कानून के मुताबिक अगर मिलावटी सामान की वजह से किसी की मौत हो जाती है तो आरोपी को उम्र कैद की सज़ा हो सकती है और उस पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी हो सकता है.

हालांकि मिलावट रोकने के लिए कुछ और कदम भी उठाए जा सकते हैं. FSSAI चाहे तो शहद का Nuclear Magnetic Resonance यानी NMR टेस्ट जरूरी कर सकती है. इस समय शहद का Export करने के लिए ये टेस्ट करना जरूरी है और शहद बेचने वाली कंपनियों के लिए शहद के स्रोत की जानकारी देना भी अनिवार्य किया जाना चाहिए.

अब हम आपको ऐसे दो तरीक़ों के बारे में बताएंगे, जिनकी मदद से आप घर बैठे शहद की शुद्धता का पता लगा सकते हैं.

– इसके लिए आप पानी से भरे एक गिलास में एक चम्मच शहद डाल दें. अगर शहद पानी में घुल जाता है तो समझ लीजिए जो शहद आप खा रहे हैं वो मिलावटी है. अगर शहद पानी में घुलने की जगह गिलास में नीचे बैठ जाता है तो इसका मतलब है, शहद असली है.

– आप आग की मदद से भी असली और मिलावटी शहद की पहचान कर सकते हैं. इसके लिए आप रुई को शहद में डुबोने के बाद उसे आग लगा दें. अगर रुई कुछ सेकेंड में जल गई तो इसका मतलब होगा शहद पूरी तरह शुद्ध है. अगर शहद मिलावटी होगा तो इसमें देर से आग लगेगी.

लेकिन ये भी सच है कि खाने-पीने की ज्यादातर वस्तुओं की जांच आप घर पर नहीं कर सकते. क्योंकि ये जांच किसी लैब में ही संभव हो पाती है. लेकिन आप मिलावटी सामान की शिकायत ज़रूर कर सकते हैं.

इसके लिए आपको FSSAI के टोल फ्री नंबर 1800112100 पर फोन करके शिकायत दर्ज करानी होगी. आप इस टोल फ्री नंबर पर भी संपर्क कर सकते हैं और मिलावट से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

मिलावटी शहद सिर्फ़ भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है. शहद दुनिया का सबसे मिलावटी पदार्थ है।

– पूरी दुनिया में शहद का सबसे बड़ा बाज़ार अमेरिका में है. अमेरिका में शहद की खपत  उत्पादन के मुक़ाबले काफ़ी ज़्यादा है. यही वजह है कि मिलावटी शहद अमेरिका के लिए भी एक बड़ी समस्या है.

– वर्ष 2009 में अमेरिका में मिलावटी शहद का सबसे बड़ा मामला सामने आया था. इसे तब वहां Honey Laundering कहा गया. उस समय दूसरे देशों की मदद से चीन ने भारत के रास्ते अमेरिका के बाजारों में मिलावटी शहद बेचा था. इस घोटाले के बाद अमेरिका में दूसरे देशों से आने वाले शहद की जांच के लिए नियम और कड़े कर दिए गए.

– कनाडा में भी दूसरे देशों से आए शहद की जांच में 27 प्रतिशत नमूने शुद्धता की जांच पर खरे नहीं उतरे.

– वर्ष 2015 में European Union ने विदेशों से आने वाली शहद का 40 प्रतिशत हिस्सा मिलावटी पाया था.

– इसी तरह ऑस्ट्रेलिया में वर्ष 2018 में वैज्ञानिकों ने मिलावटी शहद पर एक रिसर्च की थी. इसमें शहद के हर पाँच में से एक नमूने में Sugar Syrup के इस्तेमाल की बात सामने आई थी.

Centre for Science and Environment ने इससे पहले भी कई मामलों पर अपनी रिपोर्ट दी थी.

वर्ष 2003 में Coca-Cola में Pesticides का खुलासा किया गया था. तब जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति बनाई गई और उसने इस रिपोर्ट को सही माना था

-वर्ष 2010 में शहद में एंटीबाय़ोटिक होने का दावा किया गया.

-इसके बाद वर्ष 2014 में FSSAI ने शहद में एंटीबायोटिक की जांच का भी नियम जोड़ दिया

-वर्ष 2014 में चिकन में भी एंटीबायोटिक होने का दावा किया गया

-इसके बाद वर्ष 2017 में दूध, अंडे और चिकन की जांच के नए मानक बनाए गए. यानी जब भी CSE ने खाद्य पदार्थों में मिलावट पर कोई बड़ा खुलासा किया, तब तब सरकार ने Guidelines में बदलाव किए.



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