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Delhi Traffic Alert: Farmers Protest के कारण दिल्ली में कई रास्ते बंद, आखिर कब बनेगी बात?

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नई दिल्ली: 8 दिनों से चल रहे किसान आंदोलन (Farmer Protest) ने दिल्ली (Delhi) की सभी सीमाओं को घेर रखा है. कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान दिल्ली में कई जगह ट्रैफिक (Delhi Traffic) प्रभावित है. पंजाब (Punjab), हरियाणा (Haryana), उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), उत्तराखंड (Uttarakhand) के बाद अब राजस्थान (Rajasthan) और गुजरात (Gujrat) के किसान भी सिंघु बार्डर (Singhu Border) पहुंच चुके हैं.  ऐसे में अगर आप भी दिल्ली एनसीआर (Delhi-NCR) में सफर कर रहे हैं तो घर से निकलने से पहले ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी जरूर देख लें. इसमें बताया गया है कि आज दिल्ली में किन रास्तों पर जाम मिल सकता है और आपको कौन से वैकल्पिक रास्ते चुनने चाहिए.

सिंघु-टिकरी बार्डर बंद

टिकरी बार्डर (Tikri Border) पर आज भी भारी संख्या में किसान धरने (Farmer Protest) पर बैठे हैं, जिससे टिकरी बार्डर को ट्रैफिक मूवमेंट के लिए बंद रखा गया है. साथ ही सिंघु बार्डर पर भी दोनों तरफ से ट्रैफिक बंद है. इसके अलावा झारोदा और झटीकरा बार्डर को भी ब्लॉक किया गया है. हरियाणा की तरफ जाने के लिए आप कापसेरा, रजोकरी एनएच 8, बिजवासन/बजघेरा, पालम विहार और डूंडाहार सीमा का रास्ता ले सकते हैं.

ये भी पढ़ें: Farmers Protest के पल-पल के अपडेट के लिए यहां क्लिक करें

चिल्ला बार्डर, नोएडा लिंक रोड बंद

दिल्ली (Delhi) और नोएडा (Noida) के बीच सफर कर रहे लोग चिल्ला बार्डर और नोएडा लिंक रोड पर जाने से बचें. इस रूट को गौतम बुद्ध द्वार पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के चलते बंद किया गया है. मयूर विहार से नोएडा जाने वाले रास्ते पर भी आपको जाम मिल सकता है. नोएडा से दिल्ली आने-जाने के लिए आप NH24 और DND का इस्तेमाल कर सकते हैं.

कब तक चलेगा किसानों का अंदोलन

कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के साथ सरकार की बातचीत लगातार फेल हो रही है. किसान संगठनों और सरकार के बीच बीते 4 दिनों से लगातार बातचीत हो रही है. इसको लेकर विज्ञान भवन में आज भी चौथे चरण की बैठक बुलाई गई है. लेकिन किसानों के साथ सरकार की बातचीत में कोई एक मत मिलता नजर नहीं आ रहा है. पिछली बैठक में केंद्र सरकार की तरफ से ये प्रस्ताव रखा गया कि कृषि क़ानूनों की समीक्षा के लिए कमेटी बने जो जल्द ही अपना नतीजा सौंपेगी, इस पर किसानों का कहना है कि इस कमेटी में ज्यादा प्रतिनिधि किसानों की तरफ से हों.
 
MSP (Minimum support price) को लेकर भी किसान अपनी मांग पर अडे़ हैं. सरकार का कहना है कि MSP ख़त्म नहीं होगा जबकि किसान चाहते हैं कि सरकार MSP पर अपने वादे को क़ानून में जोड़े. किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती और कमेटी का फैसला नही आता तब तक उनका आंदोलन  (Farmer Protest) जारी रहेगा.

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