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‘हल परंपरा’ की नई पीढ़ी है ट्रैक्टर, किसानों के लिए बना घर-द्वार और हथियार

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नई दिल्ली: किसान आंदोलन (Farmers Protest) में एक कहानी ट्रैक्टर की भी है. पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए सैकड़ों ट्रैक्टर ने दिल्ली बॉर्डर (Delhi Border) को चारों ओर से घेर लिया है. किसानों के लिए ट्रैक्टर की अहमियत क्या है ये जानने के लिए आज ज़ी न्यूज़ की टीम दिल्ली के चारों ओर बॉर्डर पर गई.  

दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले 8 दिनों से बैठे किसानों के लिए ट्रैक्टर हथियार तो है ही. वह आंदोलनरत किसानों के लिए घर-द्वार का काम भी कर रहा है. पिछले 8 दिन से देश का अन्नदाता इसी में रह रहा है. इसी ट्रैक्टर पर प्रदर्शनकारी किसान सोते भी हैं और खाते भी हैं. 

किसानों की शाम है ट्रैक्टर
सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों के लिए ट्रैक्टर मर्सडीज से कम नहीं है. ट्रैक्टर किसानों के कर्म की सीढ़ी है. ट्रैक्टर ‘हल परंपरा’ की नई पीढ़ी है. ट्रैक्टर इन किसानों के लिए बच्चों की पढ़ाई भी है और बुजुर्गों की दवाई भी. ट्रैक्टर इन किसानों की रोटी भी है और शान भी. पहचान भी है और सम्मान भी है.

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ट्रैक्टरों के साथ डटे रहेंगे किसान
बता दें कि 8 दिन से जारी किसानों का ये आंदोलन अभी कितने दिनों तक और चलेग इसके बारे में फिलहाल कुछ भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि सरकार और किसान नेताओं के बीच गुरुवार को लगभग 8 घंटे चली बैठक में किसी बात पर सहमति नहीं बन पाई. अब अगली बैठक 5 दिसंबर को दोपहर 2 बजे होगी. 

किसान और सरकार के बीच तनातनी 
किसान और सरकार अपनी-अपनी बातों पर अड़े हुए हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि MSP को लेकर सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है. सरकार MSP के मुद्दे पर किसानों के आगे छुकने को तैयार नहीं है. बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने साफ शब्दों में कह दिया है कि MSP में कोई परिवर्तन नहीं होगा. सूत्रों ने जानकारी दी है कि किसानों से बाचतीत के दौरान वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गृह मंत्री अमित शाह से दो बार फोन पर बात की.

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बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज की बैठक में सरकार और किसान यूनियनों ने अपनी-अपनी बातें रखीं. किसानों के साथ सरकार का कोई ईगो नहीं है. उन्होंने कहा कि APMC को मजबूत करने पर सरकार काम करेगी. कृषि मंत्री ने कहा कि 5 दिसंबर को 2 बजे एक बार फिर बैठक होगी. 

किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील
एक सवाल के जवाब में कृषि मंत्री ने कहा कि आंदोलन खत्म करने को लेकर किसान नेताओं ने अभी कुछ नहीं कहा है लेकिन मैं मीडिया के माध्यम से किसानों से आग्रह करना चाहता हूं कि सरकार और किसान यूनियनों के बीच बातचीत चल रही है आप लोग अपना आंदोलन खत्म कर दें. उन्होंने कहा कि बातचीत शुरू हुई है तो हल भी निकलेगा. 

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APMC को सशक्त बनाए सरकार
कृषि मंत्री ने कहा कि किसान यूनियन और किसानों की चिंता है कि नए एक्ट से APMC खत्म हो जाएगी. भारत सरकार इस बात पर विचार करेगी कि APMC सशक्त हो और APMC का उपयोग और बढ़े. उन्होंने कहा कि किसान यूनियन की पराली के विषय में एक अध्यादेश पर शंका है, विद्युत एक्ट पर भी उनकी शंका है. इसपर भी सरकार चर्चा करने के लिए तैयार है.

‘किसान आंदोलन बना जन आंदोलन’
सूत्रों ने बताया कि बैठक में शामिल किसान नेताओं ने सरकार से साफ-साफ कह दिया है कि स्तिथि हमारे कंट्रोल से बाहर हो चुकी है. अब किसानों को समझाना हमारे हाथ में नहीं है. किसान नेताओं का कहना है कि ये आंदोलन अब सिर्फ किसानों का नहीं रहा ये जन आंदोलन बन चुका है. किसानों ने साफ-साफ कह दिया है कि सरकार को कानून रद्द करना होगा, तभी आंदोलन खत्म होगा. 



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