मध्य प्रदेश

भिखारी की हालत में बैचमेट को मिले थे Sub-Inspector, इलाज के बाद हुए ठीक, फिर करना चाहते हैं पुलिस सेवा

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शैलेंद्र सिंह/ ग्वालियर: भिखारी की हालात में मध्य प्रदेश उप चुनाव ड्यूटी के दौरान डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर और सीएसपी विजय सिंह भदौरिया को मिले पुलिस के 1999 बैच के शार्प शूटर मनीष मिश्रा का इन दिनों गुड़ा गुड़ी नाका स्थित स्वर्ग सदन आश्रम में इलाज चल रहा है. उनकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है और वे फिर से पुलिस सेवा में आकर समाज की सेवा करना चाहते हैं.

Exclusive: जो भिखारी निकला था डीएसपी का बैचमेट, सगे भाई सुना रहे हैं उनकी अनसुनी दास्तान

बुधवार को बातचीत के दौरान पूर्व सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा ने कहा कि उनकी हालत अब पहले से बेहतर है. आश्रम के लोगों का भी उन्हें भरपूर सहयोग मिल रहा है. इस दौरान मेरे कुछ बैचमेट्स और सीनियर भी मिलने आए थे, जिनसे बात करके मुझे बेहद खुशी हुई. उन्हीं लोगों की प्रेरणा से मैं चाहता हूं कि फिर से पुलिस सेवा में जाकर समाज के लिए कुछ करूं.

भिखारी के हालत में मिले थे पूर्व सब-इंस्पेक्टर
मामला 10 नवंबर, मध्यप्रदेश उपचुनाव की मतगणना की रात का है. रात करीब 1:30 बजे सुरक्षा व्यवस्था में तैनात डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर और विजय सिंह को सड़क किनारे ठंड से ठिठुरता और कचरे में खाना ढूंढ रहा एक भिखारी दिखा था. एक अधिकारी ने जूते और दूसरा अपनी जैकेट उस भिखारी को दे दी थी. जब दोनों डीएसपी वहां से जाने लगे तो भिखारी ने डीएसपी को नाम से पुकारा. जिसके बाद दोनों अचंभित हो गए और पलट कर जब गौर से भिखारी को देखा तो उनके होश उड़ गए थे. क्योंकि वह भिखारी कोई और नहीं उनके बैच का सब-इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा था. जो 10 साल से सड़कों पर लावारिस हाल में घूम रहा था.

जो भिखारी निकला था डीएसपी का बैचमेट, उसका चल रहा इलाज, मदद के लिए और साथी आए साथ

मदद के लिए आगे आए थे बैचमेट
जिस दिन मनीष का पता चला था, उसी दिन दोनों अधिकारियों ने उन्हें एक समाजसेवी संस्था में भिजवाया दिया था. जहां मनीष मिश्रा की देखभाल के साथ-साथ उनका इलाज चल रहा है.

पत्नी से वैचारिक मतभेद बना बड़ा कारण
मनीष के बड़े भाई उमेश मिश्रा जो गुना जिले में बतौर थाना प्रभारी पदस्थ है. उन्होंने मनीष के जीवन से जुड़ी सारी बातें ज़ी मीडिया के साथ साझा की थी. उनके भाई ने बताया कि मनीष ने एक काबिल पुलिस सब-इंस्पेक्टर के रूप में शुरुआत की थी. जो शुरू से ही चर्चाओं में रहा है, लेकिन उसकी पत्नी जो कि न्यायिक सेवा में पदस्थ हैं, दोनों के बीच वैचारिक मतभेद, शादी के बाद तैयारी करते हुए न्याययिक सेवा में चयन होना और दोनों के बीच तलाक होना बताया जा रहा है.

तलाक के बाद खोया मानसिक संतुलन
सभी घटनाओं का एक साथ हो जाना जिसके कारण मनीष की जिंदगी का समय सबसे तनाव भरा रहा है और यही वह वक्त था जब मनीष अंदर से टूटा और अपना मानसिक संतुलन खो बैठा. इसलिए जब भी उनकी पत्नी का जिक्र होता है तो वह अपना होश खो बैठते हैं.

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फैमिली हिस्ट्री
बतौर डीएसपी मनीष के भाई भी थानेदार हैं और पिता और चाचा एसएसपी के पद से रिटायर हुए हैं. उनकी एक बहन किसी दूतावास में अच्छे पद पर हैं. मनीष की पत्नी, जिसका उनसे तलाक हो गया, वह भी न्यायिक विभाग में पदस्थ हैं. फिलहाल मनीष के इन दोनों दोस्तों ने उसका इलाज फिर से शुरू करा दिया है.

अचूक निशानेबाज थानेदार थे मनीष
ग्वालियर के झांसी रोड इलाके में सालों से सड़कों पर लावारिस घूम रहे मनीष सन् 1999 पुलिस बैच का अचूक निशानेबाज थानेदार थे. मनीष दोनों अफसरों के साथ 1999 में पुलिस सब इंस्पेक्टर में भर्ती हुआ था. दोनों डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर और विजय भदोरिया ने इसके बाद काफी देर तक मनीष मिश्रा से पुराने दिनों की बात की और अपने साथ ले जाने की जिद की जबकि वह साथ जाने को राजी नहीं हुआ. आखिर में समाज सेवी संस्था से उसे आश्रम भिजवा दिया गया जहां उसकी अब बेहतर देखरेख हो रही है.

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