धर्म-कर्म

बैकुंठ चतुर्दशी, कार्तिक पूर्णिमा, देव दिवाली की तिथि और मुहूर्त को लेकर ना हों कन्फ्यूज़, यहां पढ़ें विस्तार से पूरी जानकारी

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हिंदू धर्म में त्यौहार पंचांग में दी गई तिथियों के अनुरूप ही मनाए जाते हैं. ये तिथियां इंग्लिश कैलेंडर के आधार पर नहीं होती बल्कि इन तिथियों को आंकने का तरीका काफी भिन्न है. इसलिए हर बार त्यौहारों पर तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी ही रहती है. वहीं इस बार लोगों में बैकुंठ चतुर्दशी (Baikunth Chaturdashi), कार्तिक पूर्णिमा और देव दिवाली को लेकर भी काफी कन्फ्यूज़न है. 

दरअसल, इस बार चतुर्दशी और पूर्णिमा की तिथि दो दिन पड़ रही हैं जिसके कारण लोगों को समझ नहीं आ रहा कि किस दिन कौन सा पर्व मनाया जाएगा. तो चलिए ना हों बिल्कुल भी कन्फ्यूज़ क्योंकि हम आपको पूरी जानकारी विस्तार से दे रहे हैं.

जानें कब है बैकुंठ चतुर्दशी

बैकुंठ चतुर्दशी का पर्व आज मनाया जा रहा है. अब आप सोच रहे होंगे कि कार्तिक पूर्णिमा की तिथि तो 30 नवंबर की बताई जा रही है तो ऐसे में चतुर्दशी 28 नवंबर यानि कि आज कैसे हो सकती हैं…तो इसका कारण ये है कि आज चतुर्दशी सुबह 10 बजकर 21 मिनट से शुरु हो चुकी है और 29 नवंबर को सुबह 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. इसीलिए आज ही बैकुंठ चतुर्दशी का पर्व मनाया जा रहा है जिसमें भगवान शिव और भगवान विष्णु की विशेष रूप से पूजा की जाती है.

29 नवंबर को होगी देव दिवाली (Dev Diwali 2020)

वहीं पूर्णिमा 30 नवंबर को है तो भला देव दिवाली 29 नवंबर को क्यों मनाई जाएगी. ये सवाल भी आपके मन में अवश्य उठ रहा होगा. तो इसका जवाब ये है कि 29 नवंबर को पूर्णिमा तिथि दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से शुरु हो जाएगी और 30 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 59 मिनट तक रहेगी. चूंकि दिवाली रात का पर्व है इसीलिए 29 नवंबर को ही देव दिवाली मनाई जाएगी. इस दिन काशी में दीप दान किया जाता है. 

30 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का स्नान (Kartika Purnima Importance)

कार्तिक मास की पूर्णिमा काफी विशेष होती है. इस दिन गंगा यमुना जैसी पवित्र नदियों में लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं और मोक्ष की कामना करते हैं. चूंकि स्नान सुबह के वक्त होता है इसलिए कार्तिक पूर्णिमा का स्नान 30 नवंबर की सुबह होगा. स्नान के बाद दान का भी विशेष महत्व बताया गया है.

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