मध्य प्रदेश

बिहार में छात्रों का स्कूल से मोह भंग! शिक्षा व्यवस्था की तमाम कोशिश ‘FAIL’

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पटना: राजधानी पटना के बीरचंद पटेल स्थित मिलर हाईस्कूल के सैनिटाइजर, वॉश बेसिन में साबून, क्लास रूम का सैनिटाइजेशन सहित दूसरे इंतजाम किए गए हैं. कोरोना संक्रमण से बचने के तमाम इंतजाम के बाद भी स्थिति ये है कि छात्र स्कूल ही नहीं पहुंच रहे हैं. शिक्षक हैं लेकिन क्लास रूम पूरी तरह से खाली. 

ये हालात सिर्फ मिलर हाई स्कूल के ही नहीं बल्कि दूसरे स्कूलों के भी हैं. कारण कोरोना का डर है. शिक्षा विभाग और संबंधित स्कूल के तमाम इंतजाम के बावजूद छात्रों के अंदर कोरोना का खौफ इतना है कि उन्होंने स्कूलों की तरफ रूख करना ही बंद कर दिया है. मिलर हाईस्कूल में क्लास 9 से 12 तक के छात्र नहीं आ रहे हैं. हालांकि, क्लास रूम में सैनिटाइजेशन रोजाना हो रहा है. लेकिन सभी तरह की कवायद भी छात्रों में विश्वास नहीं जगा पा रही है.

मिलर हाई स्कूल के प्रिंसिपल शेखर प्रसाद चौरसिया के मुताबिक, इंतजाम पूरे हैं. लेकिन बीते एक महीने में 10 छात्र भी नहीं पहुंचे हैं. शेखर प्रसाद चौरसिया का कहना है कि कुछ छात्र अगर पहुंचते हैं तो वो सिर्फ पूछताछ के लिए. दरअसल, शिक्षा विभाग ने करीब तीन महीने पहले कुछ शर्तों के साथ निजी और सरकारी दोनों तरह के वैसे स्कूल जहां पर क्लास नौ या उससे ऊपर की क्लास चलती है वहां क्लास चलाने की अनुमति दी.

शर्त ये रखी गई कि, एक तिहाई छात्र-छात्रा स्कूल आएंगे और फैक्लटी भी आधी रहेगी. छात्र अगर स्कूल पहुंचते हैं तो इसके लिए अभिभावक की अनुमति भी जरूरी होगी. लेकिन कोरोना ने एक तरह से स्कूलों छात्रों में ऐसा खौफ का माहौल खड़ा किया कि शिक्षा विभाग की तमाम तरह की कवायद धरी की धरी रह गई.

शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार भी मानते हैं कि छात्र हो या छात्रा, उस संख्या में स्कूल नहीं पहुंचे जिसकी उम्मीद थी. संजय कुमार के मुताबिक, विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती कोरोना के दौरान स्कूली व्यवस्था को पटरी पर लाने की है. जहां स्कूलों में 33 फीसदी छात्रों के आने की उम्मीद थी. वहीं जानकारी के मुताबिक. 20-22 फीसदी ही छात्र स्कूल आ रहे हैं.इसी बीच शिक्षा विभाग में इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार चल रहा है कि क्लास 1-8 तक के स्कूल कैसे खोले जाएं. इस बारे में जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है.

कोरोना की वजह से जिन चीजों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा उसमें शिक्षा व्यवस्था भी है.सरकार और संबंधित स्कूल अपनी तरफ से कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए इंतजाम तो कर रहे हैं. लेकिन कोरोना का खौफ ऐसा है कि छात्रों ने एक तरह से स्कूलों की तरफ से मुंह मोड़ लिया है.

 



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