मध्य प्रदेश

नागौर: जिला परिषद-प्रधान चुनाव में BJP-कांग्रेस में रही कड़ी टक्कर, यहां जानें किसे मिली जीत

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नागौर: पंचायती राज की स्थापना का गवाह रहे नागौर में पंचायत चुनावों में भारी उठापटक देखने को मिली. जिला प्रमुख से लेकर प्रधान तक के चुनावों में कई उलटफेर देखने को मिले. कई स्थानों पर तो बहुमत होने के बावजूद पार्टियों को मुंह की खानी पड़ी तो कई पंचायत समितियों में भारी उलटफेर और दिनभर उठापटक भी सामने आई. सबसे बड़ा नतीजा जिला परिषद का रहा जहां भाजपा सबसे बड़ी पार्टी थी. लेकिन दिनभर कयासों और अफवाहों के बीच भाजपा ने यहां जिला प्रमुख की कुर्सी पर कब्जा कर ही लिया.

बीजेपी से एक निर्वाचित सदस्य की बगावत के बाद कांग्रेस और भाजपा को बराबर 19-19 मत मिले जबकि आरएलपी को यहां 9 मत मिले. दिनभर कयास लगाए जा रहे थे कि आरएलपी किसी भी तरफ जा सकती है. लेकिन पार्टी ने अपना खुद का उमीदवार उतारा और सभी वोट अपने उमीदवार के पक्ष में ही डाले.

दूसरी तरफ भाजपा और कांग्रेस के बीच फैसला टाई रहने पर लॉटरी द्वारा फैसला लिया गया, जिसमें नतीजा बीजेपी के भागीरथ लोरा के पक्ष में रहा. कुछ ऐसी ही स्थिति मकराना पंचायत समिति की रही जहां भाजपा की बागी सुमिता भींचर और कांग्रेस को 10-10 मत मिलने से फैसला टाई रहा. लेकिन लॉटरी में भाग्य ने साथ भाजपा से बगावत करने वाली पूर्व विधायक श्रीराम भींचर की पुत्रवधू का दिया और वे प्रधान के लिए चुनी गई.

डेगाना और खींवसर में बड़ा उलटफेर देखने को मिला. डेगाना में जहां भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद भितरघात की वजह से अपनी सीट गंवा दी और कांग्रेस समर्थित उमीदवार यहां एक मत से जीत गई. कुछ ऐसी ही स्थिति खींवसर की भी रही जो रालोपा सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल का गढ़ माना जाता है. लेकिन भितरघात ने हनुमान की ‘लंका में भी आग लगा दी’. यहां रालोपा से बागी सिमा बिडियासर 6 मतों से विजयी रही.

मूंडवा पंचायत समिति में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला जहां रालोपा के पास केवल 8 सदस्य थे. लेकिन कांग्रेस और बीजेपी के भितरघात ने आरएलपी उमीदवार को यहां 25 में से 19 वोट दिलाए और कांग्रेस उमीदवार को यहां मात्र 4 वोटों से संतुष्ट होना पड़ा. जबकि एक वोट नोटा के पक्ष में रहा तो एक खारिज भी हुआ. लेकिन यहां रालोपा उम्मीदवार गीता देवी 15 मतों से विजयी रहीं.

डीडवाना और परबतसर में जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों बराबर सीटों पर थी. यहां भी कांग्रेस ने बाजी मारते हुए निर्दलीय की सहायता से कब्जा जमाया. वहीं मौलासर पंचायत समिति में जहां भाजपा के पास सर्वाधिक सदस्य होने के बावजूद यहां भी विधायक चेतन डूडी की कूटनीति काम आई और इस सीट को भी कांग्रेस ने अपने नाम कर लिया. 

जायल और लाडनूं में स्पष्ट बहुमत के चलते दोनों सीटों पर शांतिपूर्ण मतदान रहा और कांग्रेस प्रत्याशी यहां प्रधान बने जबकि मेड़ता, भेरुन्दा, रियांबड़ी, कुचमान और नावां में बीजेपी ने स्पष्ट बहुमत को कायम रखते हुए इन सीटों पर अपने प्रत्याशियों को जीत दिलाई. कुल मिलाकर आज दिनभर जोली के लिए और पार्टियों के लिए उठापटक वाला रहा. केवल डेगाना में पूर्व मंत्री अजय किलक के साथ धक्का-मुक्की की घटना को छोड़कर पूरे जिले में शांति रही. 

ये भी पढ़ें-Chittorgarh में जिला प्रमुख पद पर BJP के Suresh Dhakad निर्विरोध निर्वाचित, मना जश्न



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