मध्य प्रदेश

खाद्य व्यापारियों ने किया बड़ा निर्णय, 5 लाख लोगों पर होगा असर, 600 करोड़ का काम रहेगा ठप्प

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जयपुर: केंद्र की किसान नीतियों के विरोध (Farmer Protest) में राजस्थान की 247 अनाज मंडिया 8 दिसंबर को बंद है. भारत बंद (Bharat Bandh) के समर्थन में सभी 247 अनाज मंडियों में कामकाज नहीं होगा. मंगलवार को राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ (Rajasthan Foods Trade Association) और विभिन्न किसान संघों ने बंद के समर्थन में मंडियां बंद करने का निर्णय लिया है. एक दिन मंडी बंद रहने से 600 करोड़ रुपए के कामकाज पर असर रहेगा. साथ ही 5 लाख से अधिक मंडी कामगार प्रभावित होंगे. केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में दिसम्बर में फिर से वर्चुअल बैठक बुलाई जाएगी. जिस पर आगे की रणनीति पर मंथन होगा.

कोरोना संक्रमण (Coronavirus) में कारोबार चलाना लोहे के चने चबाने जैसा है, इस बीच में अगर कामकाज हड़ताल, विरोध और प्रदर्शन की भेंट चढ़ जाए तो समझे अच्छे दिनो का इंतजार लंबा है. राजस्थान सहित देशभर के अनाज मंडी कारोबारियों के लिए इन दिनों यह स्थिति दुविधा और भावी आशंकाओं से भरी है. कल प्रदेश की 247 अनाज मंडियों ने कामकाज बंद रखकर अपने विरोध को दर्शा रही है. इनका विरोध किसानों (Farmers) के प्रदर्शन के समर्थन में हैं। साथ ही कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य  विधायक-2020 के प्रावधानों को लेकर है. 

कारोबारियों का कहना हैं कि जो मंडी यार्ड में काम करते हैं. उन्हें लाइसेंस फीस, मंडी सेस, मंडी फीस, विकास शुल्क, कृषक कल्याण शुल्क समते केंद्र और राज्य के अन्य टैक्स अदा करने होंगे, लेकिन जो परिसर के बाहर कृषि जिंस का व्यापार करता है उसे लाइसेंस और अधिकतर शुल्क से मुक्त रखा गया है. यह दोहरा आचरण उन्हें खत्म करेगा और चुनिन्दा कॉर्पोरेटर्स के हाथों में कारोबार की लगाम देगा. इससे अकेले राजस्थान के 13 हजार कारोबारी चार लाख कामगार जिनमे श्रमिक, मुनीम सहित परिवहन से जुड़े तमाम दिहाड़ी लोग शामिल है बेरोगजारी का सामना करेंगे.

राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि किसान मण्डी में माल लाकर बेचने में खुश हैं. परन्तु भारत सरकार के नए कृषि कानूनों के द्वारा मण्डियों के बाहर कोई शुल्क नहीं हैं. जबकि मण्डियों में लगने वाला मण्डी फीस जो वर्तमान में गेहूं, धान, जौ, दलहन, मसाले तथा कपास पर 1.60 प्रतिशत; तिलहन पर 1 प्रतिशत; तथा ज्वार, मक्का, बाजरा तथा जीरा व ईसबगोल पर 0.50 प्रतिशत देय हैं और इसके साथ कृषक कल्याण फी 1 प्रतिशत देय हैं; को समाप्त कर दिया है. इसलिये मण्डी में कृषि जिन्स के क्रय विक्रय पर भी मण्डी फीस तथा कृषक कल्याण फीस समाप्त करनी चाहिये. पर चूंकि मण्डियों के मेन्टीनेन्स, प्रशासनिक खर्च तथा वांछित आवश्यक विकास के लिये धन की आवश्यकता होगी. इसके लिए आठ विकल्प राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ की ओर से राज्य सरकार को  दिए गए है.

अनाज मंडी कारोबारी संगठनों का कहना है कि प्रस्ताव के तहत राज्य सरकार मण्डी फीस और यूजर चार्ज कृषि जिन्स और अन्य वस्तुओं के क्रय विक्रय पर लगाती है तथा आढ़त 2.25 प्रतिशत से घटाकर 2.00 प्रतिशत कर देती है तो मंडी में किसान बेचने और खरीदार लेने आएगा. ऐसे में मंडियों से तेल मिल, दाल मिल, आटा मिल, मसाला उद्योग, ग्वार गम उद्योग, जिनिंग फैक्ट्री वाले तथा बल्क कन्ज्यूमर माल खरीद सकेंगे. मंडी कारोबारी भी स्पष्ट कर चुके है की कृषि बिलों पर पुनः विचार नहीं करने पर विरोध आगे भी जारी रहेगा.

 

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