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इस देश के मुस्लिमों ने COVID पीड़ित परिजनों का शव लेने से किया इनकार, जानें वजह

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कोलंबो: श्रीलंका (Sri Lanka) के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने 1 दिसंबर को मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा सरकार के उन नियमों के विरोध में दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिसके तहत COVID से संबंधित मौतों के लिए दाह संस्कार (Cremation) करने को अनिवार्य किया गया है. अधिकारियों ने कहा कि वह कोरोना वायरस के चलते मारे गए 19 मुस्लिम रोगियों के शवों का उनके परिवार के विरोध के बाद भी अंतिम संस्कार करेगा. 

दरअसल, इस देश में अक्टूबर से ही मामलों की संख्‍या में वृद्धि देखी जा रही है. यहां संक्रमण की संख्या 8 गुना से ज्‍यादा बढ़कर 29,300 हो गई है. साथ ही इस घातक वायरस के कारण 142 लोगों की मौत हो चुकी है.

परिवारों ने शव लेने से किया इनकार 
कोरोना वायरस से मरने वालों के शव उनके परिजन लेते हैं और फिर स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों की सख्‍त निगरानी में उनका दाह संस्‍कार करते हैं, लेकिन इस्‍लाम में दाह संस्‍कार की अनुमति नहीं है. वे शव को जलाने की बजाय दफनाते हैं. ऐसे में वायरस के कारण मारे गए 19 मुसलमान रोगियों के शवों को उनके परिजनों ने राजधानी कोलंबो में एक मुर्दाघर से लेने से इनकार कर दिया है.  

अटॉर्नी-जनरल डपुला डी लिवेरा के प्रवक्‍ता ने कहा है, ‘परिवार द्वारा कोरोना वायरस रोगी का शव नहीं लिए जाने पर क्‍वारंटीन रेगुलेशन के तहत उनका दाह संस्कार किया जा सकता है.’ पुलिस ने कहा है कि इसके तहत बुधवार को पांच शवों का अंतिम संस्कार किया गया.

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मुस्लिमों ने नियम को दी चुनौती 
इस नीति को मुस्लिमों ने चुनौती दी है. साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय और नागरिक समाज समूहों ने सुप्रीम कोर्ट में 12 याचिकाएं दायर की हैं. लेकिन शीर्ष अदालत ने पिछले हफ्ते बिना कारण बताए इन याचिकाओं को खारिज कर दिया. 

श्रीलंका मुस्लिम काउंसिल ने कहा है कि देश के अधिकांश कोरोना वायरस पीड़ित मुस्लिम थे. काउंसिल के एक प्रवक्‍ता ने तो यहां तक कह दिया है कि Covid-19  पॉजिटिव होने पर समुदाय के लोग इलाज लेने में भी डर रहे हैं क्‍योंकि वे कोविड-19 पॉजिटिव के मरीज के तौर पर मरने पर दाह संस्कार नहीं कराना चाहते.

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मांगी थी दफनाने की अनुमति 
ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्‍लामित कोऑपरेशन ने पिछले महीने कोलंबो से आग्रह किया था कि वे मुसलमानों को अपने परिवार के सदस्यों को अपने धार्मिक विश्वासों और दायित्वों के अनुरूप दफनाने की अनुमति दें. 

राष्‍ट्रपति गोतबया राजपक्षे का समर्थन करने वाले प्रभावशाली बौद्ध भिक्षुओं ने देश में आशंका फैलाई थी कि कोरोना पीडि़त को दफनाने से उसका शव भूमिगत जल को दूषित कर सकता है और बीमारी फैला सकता है. इसके बाद देश में कोविड-19 से मरने वाले लोगों का दाह संस्‍कार करना अनिवार्य कर दिया गया. 
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन दाह संस्कार करने और दफनाने दोनों की अनुमति देता है.

लिहाजा देश के मुसलमानों के बीच तनाव है, जिनकी संख्‍या श्रीलंका की कुल 2.1 करोड़ आबादी में 10 फीसदी है. 

 



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